📖 श्रीमद्भागवत महापुराण (१.८.१८) – श्रीकृष्ण की अद्वितीय महिमा श्लोक: “नमस्ये पुरुषं त्वाद्यमीश्वरं प्रकृते: परम्।अलक्ष्यं सर्वभूतानामन्तर्बहिरवस्थितम्॥” 🔹 कुंती माता द्वारा श्रीकृष्ण की स्तुति यह श्लोक…
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भगवान श्रीकृष्ण करुणा और उदारता के सागर हैं। उनके उदार चरित्र का गान बड़े-बड़े मुनि, योगी, वेदों के ज्ञाता और भक्तजन निरंतर करते रहते हैं।…
भगवान श्रीहरि के प्रमुख अवतार – भगवान श्रीहरि अनंत रूपों में अवतार लेते हैं, परंतु श्रीमद्भागवत महापुराण (1.3.26) में कहा गया है— 📖 “अवतार ह्यसङ्ख्येयाः…
सन्त वाणी जिनके हृदय में प्रगाढ़ दिव्य प्रेम बसता है, जिनकी आत्मा करुणा के भाव से आप्लावित होती है, वे ही वास्तव में भगवान की…
प्रेम के विकास क्रम का विस्तृत विवरण प्रेम का यह मार्ग अत्यंत गूढ़ और दुर्लभ है, जो साधक को श्रीकृष्ण की भक्ति के उच्चतम स्तर…
दुष्ट मन! तुम किस प्रकार के वैष्णव हो? हे दुष्ट मन! तुम अपने आप को किस प्रकार का वैष्णव समझते हो? एकांत स्थान में भगवान…
श्री दुर्वासा मुनि द्वारा श्रीराधारानी को अमृतहस्ता वरदान प्राप्ति लीला एक बार परम तेजस्वी ऋषि दुर्वासा जी बरसाना पधारे। उस समय श्री राधारानी अपनी सखियों…
जीवन के सर्वोत्तम प्रश्न और उनके दिव्य उत्तर 1️⃣ “सर्वोच्च विद्या क्या है?”➡ “श्रीकृष्ण की भक्ति।” 2️⃣ “सबसे बड़ा यशस्वी कार्य क्या है?”➡ “श्रीकृष्ण का…
भगवन्नाम महिमा “नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च |मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद ||” हे देवर्षि! मैं न तो वैकुण्ठ में निवास करता…
श्रीमद्भागवत 1.1.3 का अनुव्याख्यान श्लोक: निगमकल्पतरोर् गलितं फलंशुकमुखाद् अमृतद्रवसंयुतम्।पिबत भागवतं रसामयंमूहुरहो रसिका भुवि भावुका:॥ व्याख्या (शब्दार्थ एवं संरचना) अनुव्याख्या (गहरी व्याख्या एवं भावार्थ) 1. श्रीमद्भागवत…

