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मान सरोवर वृंदावन – दिव्य लीला

जहाँ राधा का मान, कृष्ण की विनय और भक्ति की पराकाष्ठा प्रकट होती है वृंदावन की पावन भूमि पर स्थित मान सरोवर केवल एक सरोवर…

वृंदावन के वृक्षों का मर्म

संत ब्रजमोहनदास जी महाराज के समीप नियमित रूप से संत श्री रामहरिदास जी आया करते थे। एक दिन उन्होंने जिज्ञासा से पूछा—“बाबा! बचपन से सुनते…

जहाँ लज्जित हों उपमाएं: सूरदास के श्रीकृष्ण रूप-वर्णन की अलौकिक छवि

जहाँ उपमाएं भी लज्जित हो गईं – श्रीकृष्ण की अनुपम शोभा का सूर-काव्य 🌸 पद: “उपमा हरि तनु देखि लजानी।कोउ जल मैं कोउ बननि रहीं…

राधा नाम की महिमा: श्रीकृष्ण को मोहित करने वाली दिव्य शक्ति

राधा नाम की महिमा रसस्वरूप श्रीकृष्ण आनन्दरूपी चन्द्रमा हैं, और श्री प्रिया जी (श्री राधा रानी) उनकी चन्द्रिका रूपी माधुरी प्रकाश हैं। जैसे चन्द्रमा बिना…

अनन्य प्रेम – एकचित्त, अव्यभिचारी भक्ति

अनन्य प्रेम” का अर्थ है – ऐसा प्रेम जिसमें किसी प्रकार की द्वैत भावना, अपेक्षा, स्वार्थ या प्रतिस्पर्धा का लेशमात्र भी न हो। यह प्रेम…

शुद्ध राधा प्रेम की चरम अवस्था – निःस्वार्थ समर्पण

शुद्ध राधा प्रेम की चरम अवस्था – निःस्वार्थ समर्पण “आश्लिष्य वा पादरतां पिनष्टु माम्…”यह श्लोक श्रीमन्महाप्रभु की शिक्षाष्टकम् का अंतिम और सबसे गंभीर भाव का…

विरह की परमावस्था – श्रीमन्महाप्रभु का भाव

“युगायितं निमेषेण चक्षुषा प्रावृषायितम्।शून्यायितं जगत् सर्वं गोविन्द विरहेण मे।।”(श्री शिक्षाष्टकम् – ७) श्रीगौरांग महाप्रभु का यह विलक्षण भावोद्गार हृदय को स्पर्श कर जाता है। महाप्रभु…

उत्कंठा और भक्ति: महाप्रभु की भावपूर्ण पुकार का रहस्य

श्रीमन्महाप्रभु के श्लोक “नयनं गलदश्रुधारया…” के माध्यम से जानिए उत्कंठा और भावयुक्त भजन का महत्व। कैसे एक साधक की व्याकुलता ही उसे भगवान के निकट…

भवसागर में डूबे जीव की पुकार: श्रीचैतन्य महाप्रभु की अहेतुकी करुणा

श्रीचैतन्य महाप्रभु की करुणामयी प्रार्थना — “अयि नन्दतनुज किंकरं पतितं मां…” — जीव की विषम भवसागर से मुक्ति की पुकार है। इस लेख में जानिए,…

श्रीचैतन्य महाप्रभु की यह प्रार्थना भक्ति की पराकाष्ठा का दिग्दर्शन कराती है।

**न धनं न जनं न सुन्दरीं, कवितां वा जगदीश कामये।मम जन्मनि जन्मनीश्वरे, भवताद् भक्तिरहैतुकी त्वयि।। — श्रीमन्महाप्रभु** श्रीचैतन्य महाप्रभु की यह प्रार्थना भक्ति की पराकाष्ठा…

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