🍃 आज गौड़ीय वैष्णवाचार्य रसिक कुल मुकुटमणि श्री रूपकवीश्वर गोस्वामी जी महाराज ( 1624 – 1684 ) की तिरोभाव महोत्सव है । 🍃 बड़ी सूरमाकुञ्ज…
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एकादश स्कन्ध – (मुक्ति स्कंध: ) मुक्ति का स्वरूप मुक्ति स्कंध: यह अनात्म भाव का परित्याग और अपने वास्तविक स्वरूप में स्थित होने की प्रक्रिया…
श्रीमद्भागवत महात्म्य श्रीमद्भागवत के महात्म्य में भक्तिरूपी माता और उनके पुत्रों—ज्ञान और वैराग्य—के कष्ट निवारण का उल्लेख मिलता है। इसमें ‘गोकर्ण उपाख्यान’ के माध्यम से…
यहाँ पर कर्म, अकर्म और विकर्म का अंतर एक सरल तालिका में प्रस्तुत है: श्रेणी अर्थ उदाहरण फल / परिणाम कर्म (Karma) शास्त्र और धर्म…
कर्म, अकर्म और विकर्म का विषय गीता और शास्त्रों में गहराई से समझाया गया है। आइए इसे सरल भाषा और उदाहरण के साथ समझते हैं:…
प्रेम की परिभाषा महाप्रभु के अनुसार सच्चा प्रेम वह है जो निस्वार्थ हो, जिसमें केवल भगवान की संतुष्टि ही उद्देश्य हो। सेवा भाव नित्य हो,…
हरिनाम का महात्म्य महाप्रभु ने हरिनाम को ही कलियुग का सर्वोत्तम साधन बताया। महाप्रभु स्वयं गलियों में “हरे कृष्ण हरे कृष्ण…” का कीर्तन करते…
गौरांग का रूप – दिव्य सौंदर्य का अद्वितीय स्वरूप दोहा : गौर वर्ण तन, नयन नील कमल, रूप अनूप विशाल।दया सिंधु जगतारक, प्रेम मूर्ति करुणा…
रूचि से ही धीरे-धीरे आसक्ति उत्पन्न होती है। जब साधक की चित्तवृत्ति आसक्ति की अवस्था में पहुँचती है, तब उसका मन केवल साधन-भजन की बाह्य…
📖 श्रीभगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 35 श्री भगवानुवाचअसंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्।अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।।6.35।। हिंदी अनुवाद श्रीभगवान् बोले — हे महाबाहो! निस्संदेह…