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प्रेम की चैतन्य परिभाषा

प्रेम की परिभाषा महाप्रभु के अनुसार सच्चा प्रेम वह है जो निस्वार्थ हो, जिसमें केवल भगवान की संतुष्टि ही उद्देश्य हो। सेवा भाव नित्य हो,…

महाप्रभु ने हरिनाम को ही कलियुग का सर्वोत्तम साधन बताया।

हरिनाम का महात्म्य महाप्रभु ने हरिनाम को ही कलियुग का सर्वोत्तम साधन बताया।   महाप्रभु स्वयं गलियों में “हरे कृष्ण हरे कृष्ण…” का कीर्तन करते…

गौरांग का रूप – दिव्य सौंदर्य का अद्वितीय स्वरूप

गौरांग का रूप – दिव्य सौंदर्य का अद्वितीय स्वरूप दोहा : गौर वर्ण तन, नयन नील कमल, रूप अनूप विशाल।दया सिंधु जगतारक, प्रेम मूर्ति करुणा…

आसक्ति की अवस्था : साधन से श्रीभगवान में सम्पूर्ण आकर्षण

रूचि से ही धीरे-धीरे आसक्ति उत्पन्न होती है। जब साधक की चित्तवृत्ति आसक्ति की अवस्था में पहुँचती है, तब उसका मन केवल साधन-भजन की बाह्य…

भगवद्गीता अध्याय 6 श्लोक 35 | मन को नियंत्रित करने का उपाय – अभ्यास और वैराग्य

📖 श्रीभगवद्गीता अध्याय 6, श्लोक 35 श्री भगवानुवाचअसंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्।अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।।6.35।। हिंदी अनुवाद श्रीभगवान् बोले — हे महाबाहो! निस्संदेह…

भगवान जगन्नाथ की अनासरा लीला – भक्त माधव दास की प्रेम कथा

भगवान जगन्नाथ की अनासरा लीला – भक्त माधव दास की प्रेम कथा भारतवर्ष की धार्मिक परंपराओं में भगवान जगन्नाथ की अनासरा लीला अत्यंत मार्मिक और…

अहो भाग्य ब्रजवासिनाम् – ब्रज की दिव्यता और भक्ति की ऊँचाई

श्रीमद्भागवत के आलोक में ब्रजभूमि और उसके वासियों के अलौकिक सौभाग्य का वर्णन, जहाँ स्वयं सनातन परब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण उनके सखा, स्वजन और आराध्य बनकर…

श्री चैतन्य महाप्रभु: श्रीमद्भागवत में गुप्त अवतार | कृष्णवर्णं त्विषाकृष्णं व्याख्या

कृष्णवर्णं त्विषाकृष्णं सांगोपांगास्त्रपार्षदम् |यज्ञैः संकीर्तनप्रायैर्यजन्ति हि सुमेधसः || जो कृष्णस्वरूप हैं, किंतु उनका वर्ण कृष्ण (श्याम) नहीं है, बल्कि गौर (स्वर्णिम) है। वे अपने भक्तों…

भावभक्ति के लक्षण: श्रील रूप गोस्वामी के अनुसार शुद्ध भक्ति की पहचान

भावभक्ति के लक्षण” — वह श्रील रूप गोस्वामी की भक्तिरसमृत सिंधु पर आधारित है, जो रागानुगा भक्ति के अत्यंत सूक्ष्म और दिव्य स्तर को उजागर…

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