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महाभारत का एक प्रसंग हैं, अश्वमेध यज्ञ चल रहा था

महाभारत का एक प्रसंग हैं, अश्वमेध यज्ञ चल रहा था, बड़े-बड़े ॠषियों और ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दी जा रही थी, कहतें हैं, कि उस यज्ञ…

श्रीमद्भागवतम् – तृतीय स्कन्ध ( सर्ग स्कंध: ) Shrimad Bhagwatam

तृतीय स्कन्ध ( सर्ग स्कंध: ) इसमें सूक्ष्म सृष्टि का वर्णन किया गया है, अर्थात् सृष्टि की मूलभूत संरचना और प्रक्रिया। इसमें सूक्ष्म महाभूत, प्राण,…

श्री नरोत्तम दास ठाकुर जी – Shri Narottam Das Thakur ji

श्री नरोत्तम दास ठाकुर जी का जीवन अद्वितीय भक्ति और त्याग का सजीव उदाहरण है। उनके जन्म, वैराग्य, और अंत समय की कथा हृदय को…

श्री मधुसूदन सरस्वती की ब्रजभक्ति – Sri Madhusudan Saraswati

यह प्रेरणादायक कथा, श्री मधुसूदन सरस्वती के जीवन में अद्वैत वेदांत से गूढ़ भक्ति मार्ग की ओर उनके परिवर्तन को दर्शाती है। श्री मधुसूदन सरस्वती…

राधा कुंड: श्रीकृष्ण और राधारानी की दिव्य कथा”अहोई अष्टमी

राधा कुंड की पौराणिक कथा अत्यंत महत्वपूर्ण और अद्भुत है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण गोवर्धन पर्वत पर गायों को चराते थे, तब अरिष्टासुर…

प्रथमः स्कंध श्रीमद्भागवत (अधिकारी)

प्रथमः स्कंध (अधिकारी) श्रीमद्भागवत में 12स्कन्ध 335 अध्याय और 18000श्लोक हैं | तेनेयम् वाड़मयि मूर्तिः प्रत्यक्षः कृष्णएवहि | यह साक्षात भगवान श्रीहरि का स्वरुप है…

दामोदर लीला: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अद्भुत प्रसंग

दामोदर लीला भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय कथा है, जिसे कार्तिक मास में विशेष रूप से स्मरण किया…

कार्तिक मास की महिमा: सत्यभामा और श्रीकृष्ण संवाद की पौराणिक कथा

नैमिषारण्य तीर्थ में अठ्ठासी हजार सनकादि ऋषियों के समक्ष श्रीसूतजी ने कहा, “अब मैं आपको कार्तिक मास की महिमा विस्तार से सुनाता हूँ। इस कथा…

भागवत कथा का आध्यात्मिक महत्व

श्रीमद्भागवत महापुराण: एक दिव्य कथा अनंत कोटि ब्रह्मांडों के नायक, परम ब्रह्म, परमेश्वर, परमात्मा भगवान नारायण की असीम अनुकंपा से हमें श्रीमद्भागवत कथा के वांग्मय…

श्रीमद्भागवत महापुराण – प्रथम स्कंध, प्रथम अध्याय, द्वितीय श्लोक

श्रीमद्भागवत महापुराण – प्रथम स्कंध, प्रथम अध्याय, द्वितीय श्लोक: “धर्मः प्रोज्झित-कैतवोऽत्र परमो निर्मत्सराणां सतांवेद्यं वास्तवमत्र वस्तु शिवदं तापत्रयोन्मूलनम्।श्रीमद्भागवते महामुनिकृते किं वा परैः ईश्वरःसद्यो हृद्यवरुध्यतेऽत्र कृतिभिः…

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