भगवन्नाम महिमा “नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां हृदये न च |मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद ||” हे देवर्षि! मैं न तो वैकुण्ठ में निवास करता…
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श्रीमद्भागवत 1.1.3 का अनुव्याख्यान श्लोक: निगमकल्पतरोर् गलितं फलंशुकमुखाद् अमृतद्रवसंयुतम्।पिबत भागवतं रसामयंमूहुरहो रसिका भुवि भावुका:॥ व्याख्या (शब्दार्थ एवं संरचना) अनुव्याख्या (गहरी व्याख्या एवं भावार्थ) 1. श्रीमद्भागवत…
श्रीमद्भागवत 1.1.2 का अनुव्याख्यान श्लोक: धर्मः प्रोज्झितकैटवोऽत्र परमो निर्मत्सराणां सतां वेद्यः।वास्तवमत्र वस्तु शिवदं तापत्रयोन्मूलनं॥श्रीमद्भागवते महामुनिकृते किं वा परैः।इश्वरः सद्यो हृद्यविरुद्ध्यतेऽत्र कृतिभिः शुश्रूषुभिः तत्-क्षणात्॥ व्याख्या (शब्दार्थ…
यह श्लोक श्रीमद्भागवत महापुराण का प्रथम श्लोक है, जो संपूर्ण ग्रंथ का आधार प्रस्तुत करता है। इसमें भगवान की परम सत्ता, ज्ञान, स्वतंत्रता, और सत्यस्वरूप…
मान लीला: श्रीराधा का कृष्ण से रूठना और पुनः मिलन श्रीकृष्ण और श्रीराधा की लीलाएं अत्यंत रहस्यमयी और दिव्य हैं। इनमें मान लीला विशेष स्थान…
108-raadha-krshn-naamaavalee यहाँ 108 राधा-कृष्ण नामों की सूची प्रस्तुत है, जिन्हें भक्तगण जपने और स्मरण करने के लिए उपयोग कर सकते हैं: यह नामावली भक्तों को…
श्रीमद् भागवत कथा हिंदू धर्म की अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र ग्रंथों में से एक है। इसे ‘भागवत महापुराण’ के नाम से भी जाना जाता है।…
108 राधा-कृष्ण नामावली
राधा-कृष्ण के दिव्य गुणों, लीलाओं और स्वरूपों का वर्णन करता है। श्री राधा-कृष्ण 108 नाम (भाग 1 – प्रारंभिक 108 नाम)
राधा-कृष्ण नाम वैष्णव भक्ति परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन नामों का जाप और स्मरण भक्त को आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर के साथ गहन संबंध…