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श्री अलारनाथ जी मंदिर – श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रेमद्रवित शरीरचिह्नों का दुर्लभ दर्शन

श्री अलारनाथ जी मंदिर, ओडिशा के जगन्नाथ पुरी से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है। यह प्राचीन मंदिर श्री हरि विष्णु को समर्पित है, जिन्हें…

श्रेयः कैरव-चंद्रिका-वितरणम्: हरिनाम संकीर्तन का मंगलमय प्रभाव

हरिनाम संकीर्तन: भक्ति का मंगलमय प्रकाश | विद्या एवं भक्ति का प्राण तत्व श्रीहरिनाम संकीर्तन जीव के मंगल रूप कुमुद के विकास के लिए ज्योत्सना…

64 प्रकार के नाम अपराध (नामापराध)

64 प्रकार के नाम अपराध (नामापराध) का वर्णन श्री चैतन्य महाप्रभु और अन्य वैष्णव आचार्यों ने किया है। ये अपराध श्री हरिनाम संकीर्तन करते समय…

दान-लीला की और गोपियों से प्रेम और भक्ति

ऐसी एक जगह है सांकरी खोर, जहा भगवान श्रीकृष्ण ने दूध दही बेचने की कुप्रथा को रोकने के लिए दान लीला की थी। कहा जाता…

भगवान श्री राधाकृष्ण की 64 प्रकार की गुप्त सेवा

भगवान श्री राधाकृष्ण की 64 प्रकार की गुप्त सेवा का उल्लेख वैष्णव ग्रंथों में मिलता है, विशेष रूप से गौड़ीय वैष्णव परंपरा में। यह सेवाएँ…

लौकिक एवं अलौकिक भाग्य

लौकिक एवं अलौकिक भाग्य प्रत्येक जीव का अपना एक लौकिक भाग्य होता है। इस लौकिक भाग्य के प्रभाव से उसे धन, परिवार, स्त्री, पुत्र, मान-सम्मान,…

दिव्य वाणी: संतों के अमृत वचनों का संग्रह

सन्त वाणी जिनके हृदय में प्रगाढ़ दिव्य प्रेम बसता है, जिनकी आत्मा करुणा के भाव से आप्लावित होती है, वे ही वास्तव में भगवान की…

प्रेम के विकास क्रम का विस्तृत विवरण

प्रेम के विकास क्रम का विस्तृत विवरण प्रेम का यह मार्ग अत्यंत गूढ़ और दुर्लभ है, जो साधक को श्रीकृष्ण की भक्ति के उच्चतम स्तर…

दुष्ट मन! तुम किस प्रकार के वैष्णव हो

दुष्ट मन! तुम किस प्रकार के वैष्णव हो? हे दुष्ट मन! तुम अपने आप को किस प्रकार का वैष्णव समझते हो? एकांत स्थान में भगवान…

श्री दुर्वासा मुनि द्वारा श्रीराधारानी को अमृतहस्ता वरदान प्राप्ति लीला

श्री दुर्वासा मुनि द्वारा श्रीराधारानी को अमृतहस्ता वरदान प्राप्ति लीला एक बार परम तेजस्वी ऋषि दुर्वासा जी बरसाना पधारे। उस समय श्री राधारानी अपनी सखियों…

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