Press "Enter" to skip to content

विरह की परमावस्था – श्रीमन्महाप्रभु का भाव

“युगायितं निमेषेण चक्षुषा प्रावृषायितम्।शून्यायितं जगत् सर्वं गोविन्द विरहेण मे।।”(श्री शिक्षाष्टकम् – ७) श्रीगौरांग महाप्रभु का यह विलक्षण भावोद्गार हृदय को स्पर्श कर जाता है। महाप्रभु…

उत्कंठा और भक्ति: महाप्रभु की भावपूर्ण पुकार का रहस्य

श्रीमन्महाप्रभु के श्लोक “नयनं गलदश्रुधारया…” के माध्यम से जानिए उत्कंठा और भावयुक्त भजन का महत्व। कैसे एक साधक की व्याकुलता ही उसे भगवान के निकट…

भवसागर में डूबे जीव की पुकार: श्रीचैतन्य महाप्रभु की अहेतुकी करुणा

श्रीचैतन्य महाप्रभु की करुणामयी प्रार्थना — “अयि नन्दतनुज किंकरं पतितं मां…” — जीव की विषम भवसागर से मुक्ति की पुकार है। इस लेख में जानिए,…

श्रीचैतन्य महाप्रभु की यह प्रार्थना भक्ति की पराकाष्ठा का दिग्दर्शन कराती है।

**न धनं न जनं न सुन्दरीं, कवितां वा जगदीश कामये।मम जन्मनि जन्मनीश्वरे, भवताद् भक्तिरहैतुकी त्वयि।। — श्रीमन्महाप्रभु** श्रीचैतन्य महाप्रभु की यह प्रार्थना भक्ति की पराकाष्ठा…

तृणादपि सुनीचेन श्लोक की व्याख्या – श्रीचैतन्य महाप्रभु की नाम साधना का रहस्य

श्रीचैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रदत्त तृणादपि सुनीचेन श्लोक की विस्तृत व्याख्या, जिसमें विनम्रता, सहनशीलता, और सच्ची भक्ति का रहस्य समाहित है। जानिए कैसे यह श्लोक नाम-साधना…

रामनवमी : प्रेम, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का पर्व

जब जब अधर्म बढ़ता है, तब तब धर्म की पुनः स्थापना हेतु स्वयं प्रभु अवतरित होते हैं। रामनवमी, प्रभु श्रीराम के प्राकट्य का वह पावन…

प्रभु ने अपने नामों में अपनी सारी शक्तियाँ रख दी हैं

श्रीशिक्षाष्टकम् की सातवीं श्लोक की गहराई और गंभीरता को बहुत सुंदर ढंग से स्पष्ट करता है।श्लोक है— “दुर्दैवमीदृशमिहाजनि नानुरागः”— यह शोक और आत्मनिंदा का भाव…

गौर प्रिय दास – भागवत प्रवक्ता, लेखक और भक्तिपथ के प्रेरक

गौर प्रिय दास | श्रीमद्भागवत कथा वक्ता | कृष्णकथा और चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाएं | Vrindavan Bhakti Speaker गौर प्रिय दास के बारे में गौर…

अभिमान या स्वाभिमान – वैष्णव दृष्टिकोण से एक चिंतन

अभिमान और स्वाभिमान का वैष्णव विवेचन | दैन्यता का भाव | श्रीकृष्ण के सेवक का आत्मनिरीक्षण अभिमान या स्वाभिमान अधिकतर अभिमान और स्वाभिमान की बात…

कामदा एकादशी व्रत कथा (चैत्र शुक्लपक्ष की पुण्यमयी तिथि)

🌸 कामदा एकादशी व्रत कथा 🌸 (चैत्र शुक्लपक्ष की पुण्यमयी तिथि) राजा युधिष्ठिर ने श्रीभगवान से पूछा:“हे वासुदेव! आपको मेरा कोटिशः प्रणाम है। कृपया यह…

You cannot copy content of this page