नाट्य शीर्षक: “भक्ति की महिमा” पात्र: दृश्य 1:(आश्रम का शांत वातावरण। वृक्ष के नीचे गुरुजी ध्यानमग्न हैं। शिष्य उनके पास आकर प्रणाम करता है।) शिष्य:(विनम्रता…
सार बात है — आचरण! “श्रवण, कीर्तन, स्मरण आदि सब साधनों का सार तब फलदायी होता है,जब मन, वाणी और कर्म में समत्व और शुद्धता…
श्रीजानकी प्राकट्य महोत्सव: करुणामयी जननी के श्रीचरणों में श्रद्धा-सुमन ॥ श्रीसीतारामाभ्यां नमः ॥ “उद्भव स्थिति संहार कारिणीं क्लेश हारिणीम्।सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं राम वल्लभाम्॥” जो जननी…
श्रीजाह्नवा माता: श्रीनित्यानंद प्रभु की आह्लादिनी शक्ति शुभ आविर्भाव तिथि की मंगलमयी वंदना! जब श्रीगौरांग महाप्रभु ने अपने पावन अवतरण के द्वारा भक्तिरस की गंगा…
संत ब्रजमोहनदास जी महाराज के समीप नियमित रूप से संत श्री रामहरिदास जी आया करते थे। एक दिन उन्होंने जिज्ञासा से पूछा—“बाबा! बचपन से सुनते…
जहाँ उपमाएं भी लज्जित हो गईं – श्रीकृष्ण की अनुपम शोभा का सूर-काव्य 🌸 पद: “उपमा हरि तनु देखि लजानी।कोउ जल मैं कोउ बननि रहीं…
राधा नाम की महिमा रसस्वरूप श्रीकृष्ण आनन्दरूपी चन्द्रमा हैं, और श्री प्रिया जी (श्री राधा रानी) उनकी चन्द्रिका रूपी माधुरी प्रकाश हैं। जैसे चन्द्रमा बिना…
अनन्य प्रेम” का अर्थ है – ऐसा प्रेम जिसमें किसी प्रकार की द्वैत भावना, अपेक्षा, स्वार्थ या प्रतिस्पर्धा का लेशमात्र भी न हो। यह प्रेम…
शुद्ध राधा प्रेम की चरम अवस्था – निःस्वार्थ समर्पण “आश्लिष्य वा पादरतां पिनष्टु माम्…”यह श्लोक श्रीमन्महाप्रभु की शिक्षाष्टकम् का अंतिम और सबसे गंभीर भाव का…
“युगायितं निमेषेण चक्षुषा प्रावृषायितम्।शून्यायितं जगत् सर्वं गोविन्द विरहेण मे।।”(श्री शिक्षाष्टकम् – ७) श्रीगौरांग महाप्रभु का यह विलक्षण भावोद्गार हृदय को स्पर्श कर जाता है। महाप्रभु…