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हरे कृष्ण महामंत्र और नामापराध का तत्त्व

🌸 हरे कृष्ण महामंत्र और नामापराध का तत्त्व 🌸


हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥


यह महामंत्र कलियुग का महौषध है।
परंतु शास्त्र बताते हैं कि यदि नाम का जप सावधानी और श्रद्धा से न हो, तो नाम के साथ कुछ अपराध भी हो सकते हैं, जो नाम-रस के प्राकट्य में बाधा बनते हैं।


🔔 हरिनाम के दस अपराध

  1. सत्पुरुषों की निन्दा
    भगवान के भक्तों की निन्दा करना सबसे बड़ा नामापराध है।
    भक्त-निन्दा से नाम का प्रभाव छिप जाता है।
  2. भगवान के नामों में भेदभाव
    कृष्ण, राम, नारायण आदि नामों को अलग–अलग फलदायक मानना।
    नाम और नामी में कोई भेद नहीं।
  3. गुरु का अपमान
    जिससे नाम मिला, उसी गुरु का तिरस्कार — यह नाम के मूल पर प्रहार है।
  4. शास्त्र-निन्दा
    वेद, पुराण, गीता, भागवत आदि को मिथ्या या काल्पनिक कहना।
  5. हरिनाम को केवल स्तुति-मंत्र मानना (अर्थवाद)
    नाम को केवल प्रशंसा समझना, उसकी चैतन्य शक्ति को न मानना।
  1. नाम के सहारे पाप करना
    यह सोचना —
    “नाम जप लेंगे, पाप तो धुल ही जाएगा।”
    यह अत्यंत गंभीर अपराध है।
  2. नाम की तुलना कर्मकाण्ड से करना
    धर्म, व्रत, दान, यज्ञ आदि के बराबर नाम को रखना।
    नाम इन सबसे परे और श्रेष्ठ है।
  3. अश्रद्धालु को नाम उपदेश देना
    जो सुनना न चाहे, जो हरि-विमुख हो — उसे नाम देना अपराध है।
  4. नाम-माहात्म्य सुनकर भी प्रेम न होना

  5. नाम की महिमा सुनकर भी हृदय न पिघले, अश्रु न आएँ।
  6. ‘मैं’ और ‘मेरे’ में आसक्त रहना
    नाम जप करते हुए भी अहंकार और भोग-बुद्धि में लिप्त रहना।

  7. 🌿 यदि नामापराध हो जाए तो क्या करें?
    शास्त्र अत्यंत करुणा के साथ उपाय बताते हैं —
    नामापराधयुक्तानां नामान्येव हरन्त्यघम्।
    (पद्म पुराण)
    अर्थ:
    नामापराध से युक्त व्यक्ति के अपराधों को भी हरिनाम ही हर लेता है।
Gaur and Nitai

  1. 🔹 उपाय क्या है?
    अपने अपराध का स्वीकार
    हृदय से पश्चात्ताप
    और फिर —
    निरंतर, विनम्र, अश्रुयुक्त नाम-कीर्तन
    नाम को ही औषधि बनाना है।
    नाम ही दोष है,
    नाम ही औषधि है,
    नाम ही मोक्ष है।

  2. 🌺 साधक के लिए अंतिम शिक्षा
    नाम को साधन नहीं, साध्य समझिए
    नाम को जप नहीं, प्रेम-संवाद बनाइए
    अपराध से डरिए नहीं,
    नाम से भागिए मत
    जहाँ अहं टूटता है,
    वहीं नाम प्रकट होता है।

  3. 🙏 जय जय श्री राधे कृष्ण

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