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दामोदर लीला: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अद्भुत प्रसंग

दामोदर लीला भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और लोकप्रिय कथा है, जिसे कार्तिक मास में विशेष रूप से स्मरण किया जाता है। इस लीला में भगवान श्रीकृष्ण की बाल सुलभ चंचलता और उनकी अनन्त दयालुता का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है।

दामोदर लीला का प्रसंग:

यह लीला तब घटित होती है जब बालक श्रीकृष्ण अपनी माता यशोदा के घर में रहते थे। एक दिन माता यशोदा मक्खन मथ रही थीं। श्रीकृष्ण को भूख लगी और वे माँ के पास जाकर दूध पीने की जिद करने लगे। यशोदाजी ने श्रीकृष्ण को दूध पिलाना शुरू किया, परंतु बीच में ही दूध उबलने की आवाज सुनकर वे उन्हें छोड़कर रसोई में चली गईं।

इससे श्रीकृष्ण क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने छोटे-छोटे हाथों से मक्खन की मटकी तोड़ दी। इतना ही नहीं, मक्खन खाकर बंदरों को भी खिलाने लगे। जब यशोदाजी लौटकर आईं और यह दृश्य देखा, तो वे क्रोधित हो गईं। उन्होंने श्रीकृष्ण को पकड़ने के लिए दौड़ना शुरू किया, परंतु श्रीकृष्ण इतने तेज थे कि यशोदाजी को उन्हें पकड़ने में बहुत मुश्किल हुई।

आखिरकार, माँ ने उन्हें पकड़ लिया और उनके इस शरारती स्वभाव के कारण उन्हें ऊखल से बाँधने का निश्चय किया। परंतु जब उन्होंने कृष्ण को बाँधने का प्रयास किया, तो उन्हें कोई भी रस्सी पूरी नहीं पड़ी। हर बार रस्सी दो अंगुल छोटी रह जाती थी।

दामोदर नाम की उत्पत्ति:

माँ यशोदा के कई प्रयासों के बाद भी रस्सी छोटी पड़ती रही। अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दया से यशोदाजी को उन्हें बाँधने का अवसर दिया। इस प्रकार उन्हें ऊखल से बाँध दिया गया और इसी घटना के कारण भगवान श्रीकृष्ण को “दामोदर” कहा गया। ‘दाम’ का अर्थ है रस्सी और ‘उदर’ का अर्थ है पेट, अर्थात् जो भगवान अपने उदर पर रस्सी से बंधे थे, उन्हें दामोदर कहा जाता है।

दामोदर लीला का संदेश:

इस लीला का एक महत्वपूर्ण संदेश यह है कि भगवान श्रीकृष्ण, जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं, वे भी अपनी भक्तों की स्नेह और भक्ति से बंध जाते हैं। इस लीला के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि प्रेम और भक्ति भगवान को जीत सकते हैं। इस लीला में भगवान की बाल लीलाओं के माध्यम से उनकी अनन्त शक्ति और स्नेहपूर्ण स्वभाव का दर्शन होता है।

श्लोक:

सत्यव्रताय धीमहि, सत्यव्रताय धीमहि।
बद्धं देवक्याः तनयं भक्तिभावेन लीलया॥

(अर्थ: हम उन भगवान श्रीकृष्ण की वंदना करते हैं, जिन्होंने अपने भक्तों की भक्ति के कारण स्वयं को बाँधने की अनुमति दी।)

दोहा:

“माखन चोरी करे किशोर, रस्सी बाँध नहीं पाई।
प्रेम बँधे भगवान तभी, जब यशोदा मुस्काई॥”

(अर्थ: श्रीकृष्ण की माखन चोरी और शरारत को यशोदा माँ ने रस्सी से बाँधने की कोशिश की, परंतु भगवान प्रेम से ही बंधते हैं।)

इस प्रकार, दामोदर लीला भगवान श्रीकृष्ण की शरारत और उनकी दया को दर्शाती है। यह लीला कार्तिक मास में विशेष रूप से याद की जाती है और इसे सुनने और स्मरण करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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