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भगवद् गीता: नवम अध्याय – राजविद्या राजगुह्य योग

भगवद् गीता: नवम अध्याय – राजविद्या राजगुह्य योग नवम अध्याय को “राजविद्या राजगुह्य योग” कहा जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को सबसे…

भगवद् गीता: अष्टम अध्याय – अकीर्तिम योग

भगवद् गीता: अष्टम अध्याय – अकीर्तिम योग अष्टम अध्याय को “अकीर्तिम योग” कहा जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को यह बताते हैं…

भगवद् गीता: सप्तम अध्याय – ज्ञान-विज्ञान योग

भगवद् गीता: सप्तम अध्याय – ज्ञान-विज्ञान योग सप्तम अध्याय को “ज्ञान-विज्ञान योग” कहा जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को ज्ञान (सिद्धांत) और…

भगवद् गीता: षष्ठ अध्याय – ध्यान योग

भगवद् गीता: षष्ठ अध्याय – ध्यान योग षष्ठ अध्याय को “ध्यान योग” कहा जाता है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को ध्यान (मेडिटेशन) के…

भगवद् गीता: पंचम अध्याय – कर्म संन्यास योग

भगवद् गीता: पंचम अध्याय – कर्म संन्यास योग पंचम अध्याय को “कर्म संन्यास योग” कहा जाता है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म योग…

भगवद् गीता: चतुर्थ अध्याय – ज्ञान कर्म संन्यास योग

भगवद् गीता: चतुर्थ अध्याय – ज्ञान कर्म संन्यास योग चतुर्थ अध्याय का नाम “ज्ञान कर्म संन्यास योग” है। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को…

भगवद् गीता: तृतीय अध्याय – कर्म योग

भगवद् गीता: तृतीय अध्याय – कर्म योग तृतीय अध्याय को “कर्म योग” कहा जाता है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण अर्जुन को कर्म का महत्व बताते…

भगवद् गीता: द्वितीय अध्याय – सांख्य योग

भगवद् गीता: द्वितीय अध्याय – सांख्य योग द्वितीय अध्याय को “सांख्य योग” कहा जाता है। यह अध्याय गीता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें भगवान…

भगवद् गीता: प्रथम अध्याय – अर्जुन विषाद योग

भगवद् गीता: प्रथम अध्याय – अर्जुन विषाद योग प्रथम अध्याय को “अर्जुन विषाद योग” कहा जाता है। इस अध्याय में महाभारत के युद्ध के प्रारंभ…

10 प्रमुख श्रीमद्भगवतगीता श्लोकों को उनके अर्थ और दोहों

श्रीमद् भगवतगीता अद्वितीय ग्रंथ है, जो जीवन के गूढ़ रहस्यों और मानवता के कल्याण का संदेश देता है। इसके प्रत्येक श्लोक में एक दिव्य संदेश…

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