बासी तुलसी
प्रश्न: कुछ लोग कहते हैं कि रविवार को तुलसी चयन नहीं करनी चाहिए तथा जल भी नहीं देना चाहिए, तो शास्त्र में इसका क्या प्रावधान है?
उत्तर: केवल रविवार ही क्यों? शास्त्रों में कई विशेष दिनों में तुलसी के पत्ते तोड़ने का निषेध बताया गया है। जहाँ तक तुलसी को जल देने का प्रश्न है, जल देना या सींचना कभी भी वर्जित नहीं है।
पद्मपुराण के उत्तर खण्ड तथा स्कन्द पुराण के अवन्ती खण्ड में वर्णित है कि तुलसी का सिंचन यमराज के भय को दूर करता है। अगस्त संहिता में भी कहा गया है कि तुलसी का रोपण, सिंचन, दर्शन, और स्पर्श करने से पवित्रता प्राप्त होती है। इसी प्रकार पद्मपुराण के अनुसार तुलसी के रोपण, पालन, सिंचन, दर्शन और स्पर्श से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।
जहाँ तक चयन का प्रश्न है, ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड में श्रीभगवान ने तुलसी चयन के लिए कुछ निषेध समय बताए हैं, जैसे पूर्णिमा, अमावस्या, द्वादशी, सूर्य संक्रांति, मध्याह्नकाल, रात्रि, संध्याकाल, अशौच काल, तथा बिना स्नान किए चयन करना। इन समयों में तुलसी चयन वर्जित है।
वाराह पुराण में निषिद्ध काल में तुलसी की पूजा के लिए यह समाधान बताया गया है कि उस समय स्वतः गिरे हुए तुलसी दलों से पूजा करें:
“निषिद्धे दिवसे प्राप्ते गृहणीयात् गलितं दलम्। तेनैव पूजा कुर्वति न पूजा तुलसीं बिना।।”
इसके अतिरिक्त शालग्राम की नित्य पूजा के लिए निषिद्ध समय में भी तुलसी का चयन आवश्यक माना गया है। विष्णु धर्मोत्तर में भी कहा गया है कि द्वादशी तिथि को तुलसी चयन नहीं करना चाहिए।
तुलसी के पत्तों को चुनकर उन्हें घर में रखकर पूजा में उपयोग किया जा सकता है क्योंकि तुलसी दल बासी नहीं माने जाते।
अनेकों पुराणों में यह श्लोक उद्धृत है:
“वर्ज्यं पर्युषितं पुष्पं, वर्ज्यं पर्युषितं जलम्। न वर्ज्यं तुलसी दलं, न वर्ज्यं जाह्नवी जलम्।।”
अर्थात, फूल और जल बासी हो सकते हैं, पर तुलसी दल और गंगाजल कभी बासी नहीं माने जाते।
जय श्री राधे! जय निताई!
तुलसी बासी (या तुलसी के पत्ते बासी होते हैं) नहीं होते हैं, बल्कि तुलसी की पत्तियाँ ताजगी और पवित्रता का प्रतीक मानी जाती हैं। हालांकि, यदि तुलसी की पत्तियाँ लंबे समय तक बाहर रखी जाएं या उचित देखभाल न की जाए, तो वे सूख सकती हैं, लेकिन उन्हें बासी कहना सही नहीं है। तुलसी की पत्तियाँ शुद्ध, ताजगी, और स्वास्थ्य के लाभ के लिए जानी जाती हैं।
तुलसी का धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व भी है। इसे “औषधियों की रानी” माना जाता है और इसके पत्तों को ताजे रूप में खाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
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